rameshkhola

|| A warm welcome to you, for visiting this website - RAMESH KHOLA || || "बुद्धिहीन व्यक्ति पिशाच अर्थात दुष्ट के सिवाय कुछ नहीं है"- चाणक्य ( कौटिल्य ) || || "पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए, उसे जगह, वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है" - विदुर || || सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास - गोस्वामी तुलसीदास (श्रीरामचरितमानस, सुंदरकाण्ड, दोहा संख्या 37) || || जब आपसे बहस (वाद-विवाद) करने वाले की भाषा असभ्य हो जाये, तो उसकी बोखलाहट से समझ लेना कि उसका मनोबल गिर चुका है और उसकी आत्मा ने हार स्वीकार कर ली है - रमेश खोला ||

Welcome board

Natural

welcome

आपका हार्दिक अभिनन्दन है

Search

11 May 2026

Mother's Day

                                                                  Mother's Day

आओ जाने Mother's Day क्यों मनाया जाता है। .......

मदर्स दे (मातृ दिवस) का आयोजन अमेरिका में ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में "एना जार्विस" के द्वारा आरम्भ किया गया था। । उन्होंने 10 मई, 1908 को वर्जीनिया के एक चर्च में पहला मदर्स डे मनाया गया, जिसे 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को राष्ट्रीय अवकाश (अमेरिका का) के रूप में घोषित किया।

 मदर्स दे (मातृ दिवस) अनाथ बच्चों के प्रति समाज की कुछ विशेष वर्ग की महिलाओं द्वारा ममत्व दिखाने का दिन है जो अनाथ बच्चे होते हैं उन्हें इस दिन अपनी 1 दिन की वात्सल्य देने वाली मां के लिए अति प्रेम रहता है सामान्यता यह दिन यूरोप अमेरिका में ही मनाया जाता है यानि एक दिन की माँ के सम्मान में मनाया जाता है | 

अब बिना बुद्धि लगाए हमारे कुछ भारतीय साथी  मदर डे मना रहे है और खूब स्टेटस लगा रहे  हैं , उन्हें भारत  पाश्चात्य समाज  संरंचना  ज्ञान है नहीं भेड़ चाल चलने में माहिर , इस पोस्ट  पढ़कर मुझे जरूर कोसेंगे , हमारे यहां परिवार , रिश्ते नाते एक बहुत ही समृद्ध ढांचा है जो पश्चिमी देशों  में देखने को नहीं मिलता 

भारतीय महाद्वीप में इस तरह का कोई दिन नहीं है भारतीय लोग सदा अपने मां बाप की छत्रछाया में रहते हैं , भारतीय लोगों के लिए मां से प्रेम या पिता से प्रेम सदैव ही आजीवन अकल्पनीय एवं अद्भुत रहा है 

                  - रमेश खोला , ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष नवमी साल 2083 ( ग्रेगोरियन कैलेंडर अनुसार 11 मई 2026) 

No comments:

Post a Comment

नमस्कार दोस्तो ,
आप, प्रतिक्रिया (Feedback) जरूर दे, ताकि कुछ कमी/गलती होने पर वांछित सुधार किया जा सके ताकि पोस्ट की गयी सामग्री/कंटेंट आपके लिए उपयोगी हो सके और मुझे इससे भी अच्छे कंटेंट डालने के लिए प्रोत्साहन मिल सके, इसके साथ साथ यहाँ पोस्ट की गयी सामग्री / कंटेंट को आप अपने स्तर पर जाँच ले :- आपका अपना साथी - रमेश खोला

विजिटर्स के लिए सन्देश

साथियो , यहां डाली गयी पोस्ट्स के बारे में प्रतिक्रिया जरूर करें , ताकि वांछित सुधार का मौका मिले : रमेश खोला

संपर्क करने का माध्यम

Name

Email *

Message *

Followers

Popular Posts