राम वन गमन मार्ग
- अयोध्या
यहीं से 14 वर्ष के वनवास की पूरी यात्रा आरंभ हुई थी।
- प्रभु राम ने तमसा नदी के तट से होते हुए वन की ओर प्रस्थान किया था।
- यह उनके त्याग और पिता के वचन पालन का प्रथम बिंदु था।
- महर्षि भारद्वाज आश्रम
वर्तमान प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में स्थित यह आश्रम गंगा पार करने के बाद भगवान राम का पहला बड़ा पड़ाव था।
- यहाँ भगवान राम ने महर्षि भारद्वाज से आगे के मार्ग के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया था।
- महर्षि ने ही उन्हें चित्रकूट में निवास करने की सलाह दी थी।
- महर्षि वाल्मीकि तपोस्थली चित्रकूट प्रमुख द्वार लालापुर
वर्तमान में यह स्थान उत्तर प्रदेश के लालापुर (चित्रकूट के समीप) में स्थित है।
- चित्रकूट पहुंचने से पहले प्रभु राम ने महर्षि वाल्मीकि के इस आश्रम में भेंट की थी।
- रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने ही उन्हें कामदगिरि पर्वत के पास कुटिया बनाने का सुझाव दिया था।
- सती अनुसूया मंदिर
वर्तमान मध्य प्रदेश के चित्रकूट वन क्षेत्र में यह पवित्र स्थान महर्षि अत्रि और सती अनुसूया का आश्रम है।
- चित्रकूट से विदा लेते समय राम, सीता और लक्ष्मण यहाँ आए थे।
- यहीं सती अनुसूया ने माता सीता को पातिव्रत धर्म का उपदेश और कभी मलिन न होने वाले दिव्य वस्त्र व आभूषण दिए थे।
- शरभङ्ग आश्रम
यह आश्रम मध्य प्रदेश के सतना जिले के घने जंगलों में स्थित है, जहाँ से दंडकारण्य का मूल क्षेत्र शुरू होता है।
- महर्षि शरभंग ने भगवान राम के दर्शन के लिए ही अपने प्राण रोक रखे थे।
- राम जी के दर्शन करने के बाद उन्होंने योग अग्नि में अपनी देह त्याग दी थी।
- सुतीक्ष्ण आश्रम
यह आश्रम भी वर्तमान मध्य प्रदेश (सतना/पन्ना सीमा के पास) के दंडक वन क्षेत्र में स्थित है।
- महर्षि सुतीक्ष्ण, अगस्त्य मुनि के परम शिष्य थे।
- उन्होंने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और उन्हें अपने गुरु अगस्त्य मुनि से मिलने की प्रेरणा दी।
- महामुनि अगस्त्य ऋषि आश्रम, अकोला
वर्तमान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले (अकोले/भंडारदरा के पास) में यह महान आश्रम स्थित है।
- यहीं महर्षि अगस्त्य ने भगवान राम को भगवान विष्णु का धनुष, अमोघ बाण और दिव्य खड्ग प्रदान किया था।
- अगस्त्य मुनि के सुझाव पर ही राम जी ने आगे पंचवटी में निवास करने का निर्णय लिया था।
- पंचवटी
महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह स्थान वनवास का एक और प्रमुख केंद्र रहा।
- यहीं शूर्पणखा की नाक काटी गई थी और खर-दूषण के साथ युद्ध हुआ था।
- रावण द्वारा माता सीता का छलपूर्वक हरण भी इसी स्थान से हुआ था।
- मातंग महर्षि आश्रम
कर्नाटक के हम्पी (प्राचीन किष्किंधा) के पास ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित यह आश्रम शबरी की कथा से जुड़ा है।
- मतंग ऋषि की शिष्या माता शबरी ने यहीं भगवान राम को अपने जूठे बेर खिलाए थे।
- इसी क्षेत्र में राम जी की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई थी।
- रामेश्वरम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में समुद्र तट पर स्थित यह स्थान लंका प्रस्थान का अंतिम बिंदु है।
- यहीं भगवान राम ने भगवान शिव की आराधना कर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
- यहीं से नल और नील के नेतृत्व में वानर सेना ने लंका तक राम सेतु का निर्माण किया था।

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