rameshkhola

|| A warm welcome to you, for visiting this website - RAMESH KHOLA || || "बुद्धिहीन व्यक्ति पिशाच अर्थात दुष्ट के सिवाय कुछ नहीं है"- चाणक्य ( कौटिल्य ) || || "पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए, उसे जगह, वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है" - विदुर || || सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास - गोस्वामी तुलसीदास (श्रीरामचरितमानस, सुंदरकाण्ड, दोहा संख्या 37) || || जब आपसे बहस (वाद-विवाद) करने वाले की भाषा असभ्य हो जाये, तो उसकी बोखलाहट से समझ लेना कि उसका मनोबल गिर चुका है और उसकी आत्मा ने हार स्वीकार कर ली है - रमेश खोला ||

Welcome board

Natural

welcome

आपका हार्दिक अभिनन्दन है

Search

17 August 2026

Ram Van Gaman path

 जय श्री राम जय हनुमान 

राम वन गमन पथ 
  • अयोध्या यहीं से 14 वर्ष के वनवास की पूरी यात्रा आरंभ हुई थी।
    • प्रभु राम ने तमसा नदी के तट से होते हुए वन की ओर प्रस्थान किया था।
    • यह उनके त्याग और पिता के वचन पालन का प्रथम बिंदु था।

  • महर्षि भारद्वाज आश्रम वर्तमान प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में स्थित यह आश्रम गंगा पार करने के बाद भगवान राम का पहला बड़ा पड़ाव था।
    • यहाँ भगवान राम ने महर्षि भारद्वाज से आगे के मार्ग के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया था।
    • महर्षि ने ही उन्हें चित्रकूट में निवास करने की सलाह दी थी।


  • महर्षि वाल्मीकि तपोस्थली चित्रकूट प्रमुख द्वार लालापुर वर्तमान में यह स्थान उत्तर प्रदेश के लालापुर (चित्रकूट के समीप) में स्थित है।


    • चित्रकूट पहुंचने से पहले प्रभु राम ने महर्षि वाल्मीकि के इस आश्रम में भेंट की थी।
    • रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने ही उन्हें कामदगिरि पर्वत के पास कुटिया बनाने का सुझाव दिया था।

  •  चित्रकूट  वर्तमान में यह स्थान  मध्य प्रदेश में स्थित है।
    • चित्रकूट में भगवान श्री राम ने रहने के लिए पर्णकुटीर बनाई ।
    • राम-भरत  मिलाप भी चित्रकूट में ही हुआ।
    • भगवान राम अपनी चरण पादुका देकर भरत को अयोध्या लौटा दिया ।


  • सती अनुसूया मंदिर वर्तमान मध्य प्रदेश के चित्रकूट वन क्षेत्र में यह पवित्र स्थान महर्षि अत्रि और सती अनुसूया का आश्रम है।
    • चित्रकूट से विदा लेते समय राम, सीता और लक्ष्मण यहाँ आए थे।


  • शरभङ्ग आश्रम यह आश्रम मध्य प्रदेश के सतना जिले के घने जंगलों में स्थित है, जहाँ से दंडकारण्य का मूल क्षेत्र शुरू होता है।
  • महर्षि शरभंग ने भगवान राम के दर्शन के लिए ही अपने प्राण रोक रखे थे।
  • राम जी के दर्शन करने के बाद उन्होंने योग अग्नि में अपनी देह त्याग दी थी।


  • सुतीक्ष्ण आश्रम यह आश्रम भी वर्तमान मध्य प्रदेश (सतना/पन्ना सीमा के पास) के दंडक वन क्षेत्र में स्थित है।
    • महर्षि सुतीक्ष्ण, अगस्त्य मुनि के परम शिष्य थे।
    • उन्होंने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और उन्हें अपने गुरु अगस्त्य मुनि से मिलने की प्रेरणा दी।


  • महामुनि अगस्त्य ऋषि आश्रम, अकोला वर्तमान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले (अकोले/भंडारदरा के पास) में यह महान आश्रम स्थित है।
    • यहीं महर्षि अगस्त्य ने भगवान राम को भगवान विष्णु का धनुष, अमोघ बाण और दिव्य खड्ग प्रदान किया था।
    • अगस्त्य मुनि के सुझाव पर ही राम जी ने आगे पंचवटी में निवास करने का निर्णय लिया था।


  • पंचवटी महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह स्थान वनवास का एक और प्रमुख केंद्र रहा।

    • यहीं शूर्पणखा की नाक काटी गई थी और खर-दूषण के साथ युद्ध हुआ था।
    • रावण द्वारा माता सीता का छलपूर्वक हरण भी इसी स्थान से हुआ था।


  • मातंग महर्षि आश्रम कर्नाटक के हम्पी (प्राचीन किष्किंधा) के पास ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित यह आश्रम शबरी की कथा से जुड़ा है।


    • मतंग ऋषि की शिष्या माता शबरी ने यहीं भगवान राम को अपने जूठे बेर खिलाए थे।
    • इसी क्षेत्र में राम जी की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई थी।


  • ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित 'किष्किंधा' वानरों का एक प्रसिद्ध राज्य था, जिस पर पहले बालि और बाद में सुग्रीव ने शासन किया। भौगोलिक रूप से इसे वर्तमान समय में कर्नाटक के हंपी (विजयनगर) क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है, जो तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित है।

    • राम-सुग्रीव मित्रता: यहीं भगवान राम और हनुमान जी की सुग्रीव से भेंट हुई थी।
    • बालि वध: श्री राम ने बाली का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया था।
    • सीता खोज: यहीं से वानर सेना को चारों दिशाओं में सीता जी की खोज के लिए भेजा गया था।

  • रामेश्वरम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में समुद्र तट पर स्थित यह स्थान लंका प्रस्थान का अंतिम बिंदु है।
    • गंधमादन पर्वत (रामेश्वरम, तमिलनाडु) एक प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक पहाड़ी है। इसे 'रामर पादम' भी कहते हैं। यहाँ भगवान श्रीराम के पैरों के चिह्न एक चक्र पर अंकित हैं, जिनका दर्शन करने देश-विदेश से भक्त आते हैं। मान्यता है कि यहीं से हनुमान जी ने लंका के लिए छलांग लगाई थी। 
    • यहीं भगवान राम ने भगवान शिव की आराधना कर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
    • यहीं से नल और नील के नेतृत्व में वानर सेना ने लंका तक राम सेतु का निर्माण किया था।

No comments:

Post a Comment

नमस्कार दोस्तो ,
आप, प्रतिक्रिया (Feedback) जरूर दे, ताकि कुछ कमी/गलती होने पर वांछित सुधार किया जा सके ताकि पोस्ट की गयी सामग्री/कंटेंट आपके लिए उपयोगी हो सके और मुझे इससे भी अच्छे कंटेंट डालने के लिए प्रोत्साहन मिल सके, इसके साथ साथ यहाँ पोस्ट की गयी सामग्री / कंटेंट को आप अपने स्तर पर जाँच ले :- आपका अपना साथी - रमेश खोला

विजिटर्स के लिए सन्देश

साथियो , यहां डाली गयी पोस्ट्स के बारे में प्रतिक्रिया जरूर करें , ताकि वांछित सुधार का मौका मिले : रमेश खोला

संपर्क करने का माध्यम

Name

Email *

Message *

Followers

Popular Posts