खतरनाक है, बंद बोतल का पानी
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अखबार में रखकर, तली हुई खाद्य सामग्री न खाए
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पुराने समय की कहावत
चैते गुड़, वैसाखे तेल । जेठ के पंथ , अषाढ़े बेल ।
सावन साग, भादौ दही। कुवांर करेला, कार्तिक मही ।।
अगहन जीरा, पूसै धना। माघे मिश्री, फागुन चना ।
जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर न धरै ।।
⇓⇓⇓⇓⇓अर्थ ⇓⇓⇓⇓⇓
चैत्र माह (मार्च-अप्रैल ) में नया गुड़ न खाएं
बैसाख माह (अप्रैल-मई) में नया तेल न लगाएं
जेठ माह (मई -जून) में दोपहर में नहीं चलना चाहिए
अषाढ़ माह (जून-जुलाई) में बेल न खाएं
सावन माह (जुलाई-अगस्त ) में साग न खाएं
भादों माह (अगस्त-सितम्बर) में दही न खाएं
क्वार /आश्विन माह (सितम्बर-अक्टूबर) में करेला न खाएं
कार्तिक माह (अक्टूबर-नवम्बर) में जमीन पर न सोएं
अगहन/ मार्घशीर्ष माह (नवम्बर-दिसंबर ) में जीरा न खाएं
पूस माह (दिसंबर-जनवरी) में धनिया न खाएं
माघ माह (जनवरी-फ़रवरी) में मिश्री न खाएं
फागुन माह (फ़रवरी-मार्च) में चना न खाएं
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प्राचीन कहावत
ज्वर, जुकाम और पावना
इनका एक उपाय
लगण दीजे तान के
कभी ना वापस आय
(अर्थ : बुखार, जुकाम और खांसी होने पर उपवास /अल्प आहार/हल्का भोजन करें )
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09.12.2023 news clip~~~~~~~~~~~
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गुड़ खाने के फायदे
गुड़ मैग्नीशियम का एक बेहीतरीन स्रोत है। गुड़ खाने से मांसपेशियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को थकान से राहत मिलती है और खून की कमी दूर करने में भी यह बेहद मददगार साबित होता है। गुड़ का नियमित सेवन करना रक्तसंचार को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही रक्तचाप की समस्याओं में भी फायदेमंद है। पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज में भी गुड़ का सेवन बहुत लाभकारी है। खाना खाने के बाद थोड़ा सा गुड़ खाना आपके पाचन को बेहतर बनाता है। गुड़ का प्रतिदिन सेवन आपको सर्दी, खांसी और जुकाम से भी बचाता है। सर्दी के दिनों में गले और फेफड़ों में संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है, इससे बचाने में भी गुड़ आपकी बहुत मदद कर सकता है। सर्दी और संक्रमण की ज्यादातर दवाईयों में गुड़ का प्रयोग किया जाता है।
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गुणकारी जामुन :
जामुन एक औषधि है। जामुन की लकड़ी का टुकडा पानी में रख दे तो पानी में शैवाल, हरी काई नहीं लगेगी । प्राचीन समय में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो तलहटी में जामून की लकड़ी का फर्श बिछाया जाता था जिसे जमोट कहते थे । जामुन विटामिन सी और आयरन से भरपूर होता है, पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। चाय में जामुन पत्तियां डाल कर सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलता है , जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण भी होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है।
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कहानी : मांस का मूल्य
सम्राट ने एक बार अपनी सभा मे पूछा :
देश की खाद्य समस्या को सुलझाने के लिए सबसे सस्ती वस्तु क्या है ?
मंत्री परिषद् तथा अन्य सदस्य सोच में पड़ गये !
चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा आदि तो बहुत श्रम के बाद मिलते हैं और वह भी तब, जब प्रकृति का प्रकोप न हो, ऎसी हालत में अन्न तो सस्ता हो ही नहीं सकता !
तब शिकार का शौक पालने वाले एक सामंत ने कहा :
राजन,
सबसे सस्ता खाद्य पदार्थ "मांस" है,
इसे पाने मे मेहनत कम लगती है और पौष्टिक वस्तु खाने को मिल जाती है ।
सभी ने इस बात का समर्थन किया, लेकिन प्रधान मंत्री चाणक्य चुप थे ।
तब सम्राट ने उनसे पूछा :
प्रधानमंत्री जी, आपका इस बारे में क्या मत है ?
चाणक्य ने कहा : मैं अपने विचार कल आपके समक्ष रखूंगा !
रात होने पर प्रधानमंत्री उस सामंत के महल पहुंचे, सामन्त ने द्वार खोला, इतनी रात गये प्रधानमंत्री को देखकर घबरा गया ।
प्रधानमंत्री ने कहा :
महाराज एकाएक बीमार हो गये हैं, राजवैद्य ने कहा है कि किसी बड़े आदमी के हृदय का दो तोला मांस मिल जाए तो राजा के प्राण बच सकते हैं, इसलिए मैं आपके पास आपके हृदय का सिर्फ दो तोला मांस लेने आया हूं । इसके लिए आप एक हजार स्वर्ण मुद्रायें ले लें ।
यह सुनते ही सामंत के चेहरे का रंग उड़ गया, उसने प्रधानमंत्री के पैर पकड़ कर माफी मांगी और उल्टे एक हजार स्वर्ण मुद्रायें देकर कहा कि इस धन से वह किसी और सामन्त के हृदय का मांस खरीद लें ।
प्रधानमंत्री बारी-बारी सभी सामंतों, सेनाधिकारियों के यहां पहुंचे और सभी से उनके हृदय का दो तोला मांस मांगा, लेकिन कोई भी राजी न हुआ, उल्टे सभी ने अपने बचाव के लिये प्रधानमंत्री को एक हजार , दो हजार यहां तक कि कुछेक ने तो पांच से दस हजार तक स्वर्ण मुद्रायें दे दीं ।
इस प्रकार करीब एक करोड़ स्वर्ण मुद्राओं का संग्रह कर प्रधानमंत्री सवेरा होने से पहले वापस अपने महल पहुंचे और राजसभा में प्रधानमंत्री ने राजा के समक्ष एक करोड़ स्वर्ण मुद्रायें रख दीं ।
सम्राट ने पूछा :
यह सब क्या है ?
तब प्रधानमंत्री ने बताया कि दो तोला मांस खरिदने के लिए इतनी धनराशि इकट्ठी हो गई फिर भी दो तोला मांस नही मिला ।
राजन ! अब आप स्वयं विचार करें कि मांस कितना सस्ता है ?
जीवन अमूल्य है, हम यह न भूलें कि जिस तरह हमें अपनी जान प्यारी है, उसी तरह सभी जीवों को भी अपनी जान उतनी ही प्यारी है।
मानव आहार, शाकाहार !
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दिल को बीमार बनाता है चाउमीन में प्रयोग होने वाला अजीनोमोटो
हमारे पुराने ज्ञान में विज्ञान छुपा था

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पुराने समय की बात है जब देगची , भगौना, पतीला (खुला बर्तन) आदि में दाल / चावल / खिचड़ी / राबड़ी आदि बनता था, जब अनाज उबलता था तो बार-बार एक झाग की परत जमा होती रहती थी, जिसे खाना पकाने वाली बार-बार उतार कर नीचे किसी बर्तन में डाल देती थी बाद में उसे फेक दिया करती थी। पूछने पर कहती कि "इसे खाने से तबियत खराब हो जाती है"
बाद में बड़े होने पर पता चला वो झाग शरीर मे यूरिक एसिड बढ़ाता है और खाना पकाने वाली इसीलिए उस झाग फेंक दिया करती थी। खाना पकाने वाली ( आम औरत ) ज्यादा पढ़ी लिखी तो होती नही थी पर ये बातें उसे अपनी माँ , दादी , नानी से सीखा था।
अब कूकर में दाल / चावल / खिचड़ी / राबड़ी आदि बनता है, पता नही झाग कहा जाता होगा, दाल / चावल / खिचड़ी / राबड़ी आदि खाने से अकसर पेट खराब हो जाता हैं
डॉक्टर कहते हैं एसिडिटी है या फ़ूड प्वाइजनिंग हो गया
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भोजन के नियम


साभार : प्रिंट एवं सोशल मीडिया
पनीर के बारे में क्या कहता है आयुर्वेद :
बीमारी का कारण क्या पनीर भी है?
बात करते हैं आज के सबसे प्रसिद्ध खाद्य भोजन *पनीर* की, भारतीय लोग तो पनीर के इतने दीवाने हो चुके हैं कि इन्हें जहां पनीर मिल जाता है बहुत ही मजे से चाप लेते हैं, होटल में गए तो बिना पनीर खाये इनके गले से निवाला नहीं निगलता कढ़ाई पनीर, शाही पनीर, मटर पनीर, चिली पनीर और भी न जाने क्या क्या पनीर समोसे में पनीर, पकौड़ी में पनीर, पिज्जा में पनीर, बर्गर में पनीर, मतलब जहां देखो वहां पनीर, भारत में शायद जितना दूध पैदा नहीं होता उससे ज़्यादा पनीर बनता होगा।
चिकित्सा विज्ञान में सबसे प्राचीन विधा आयुर्वेद में दूध, दही, घी का जिक्र हर जगह है किन्तु इस नामुराद पनीर का जिक्र कहीं नहीं मिलता, आखिर क्यों ? यदि पनीर इतना ही अच्छा है तो इसके बारे में किसी ऋषि ने कुछ लिखा क्यों नहीं ?
जब गहराई से इसकी पड़ताल की तो पता चला कि
आयुर्वेद में पनीर को निकृष्टतम भोजन के रूप में बताया गया है, बोले तो कचरा और कचरा भी ऐसा वैसा नहीं, ऐसा कचरा जिसे जानवरों को भी खिलाने से मना किया गया है।
दूध को फाड़ कर या दूध का रूप विकृत करके पनीर बनता है, जैसे कोई सब्जी सड़ जाए तो क्या उसे खाएंगे ?
पनीर भी सड़ा हुआ दूध है,
भारतीय इतिहास में कहीं भी पनीर का उल्लेख नहीं है न ही ये भारतीय व्यंजन है, क्योंकि भारत में प्राचीन काल से ही दूध को विकृत करने की मनाही रही है, आज भी ग्रामीण समाज में घर की महिलाएं अपने हाथ से कभी दूध नहीं फाड़ती!
पनीर खाने के नुकसान
आयुर्वेद ने तो शुरू से ही मना किया था कि विकृत दूध लिवर और आंतों को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन अब आधुनिक विज्ञान ने भी अपने नए शोध में साबित किया है कि पनीर खाने से आंतों पर अतिरिक्त दबाव आता है जिससे पाचन संबंधित रोग होते हैं, पनीर में पाया जाने वाले प्रोटीन पचाने की क्षमता जानवरों में भी नहीं होती है फिर मनुष्य उसे कैसे पचा सकता है !नतीजा होता है खतरनाक कब्ज, फैटी लीवर और आगे चल कर शुगर, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लडप्रेशर और यही पनीर पेट की खतरनाक बीमारी IBS को भी पैदा करता है।
ज़्यादा पनीर खाने से खून में थक्के जमने की शिकायत होती है, जो ब्रेन हैमरेज और हार्ट फेलियर का कारण बनता है। वहीं ये पनीर हार्मोनल डिसबैलेंस का कारण बनता है जिससे हाइपोथायरायडिज्म या हाइपरथायराइडिज्म पनपता है, महिलाओं में गर्भ धारण करने की क्षमता कम होती है पुरुषों में नपुंसकता आती है।
कुल मिला कर यदि देखा जाए तो ये पनीर लाभ तो सिर्फ जीभ को देता है लेकिन हानि पूरे शरीर की करता है, इसलिए अगली बार पनीर खाने से पहले सोचिएगा जरूर।
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नमस्कार दोस्तो ,
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