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|| A warm welcome to you, for visiting this website - RAMESH KHOLA || || "बुद्धिहीन व्यक्ति पिशाच अर्थात दुष्ट के सिवाय कुछ नहीं है"- चाणक्य ( कौटिल्य ) || || "पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए, उसे जगह, वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है" - विदुर || || सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास - गोस्वामी तुलसीदास (श्रीरामचरितमानस, सुंदरकाण्ड, दोहा संख्या 37) || || जब आपसे बहस (वाद-विवाद) करने वाले की भाषा असभ्य हो जाये, तो उसकी बोखलाहट से समझ लेना कि उसका मनोबल गिर चुका है और उसकी आत्मा ने हार स्वीकार कर ली है - रमेश खोला ||

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17 August 2026

Ram Van Gaman path

 जय श्री राम जय हनुमान 

राम वन गमन पथ 
  • अयोध्या यहीं से 14 वर्ष के वनवास की पूरी यात्रा आरंभ हुई थी।
    • प्रभु राम ने तमसा नदी के तट से होते हुए वन की ओर प्रस्थान किया था।
    • यह उनके त्याग और पिता के वचन पालन का प्रथम बिंदु था।

  • महर्षि भारद्वाज आश्रम वर्तमान प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में स्थित यह आश्रम गंगा पार करने के बाद भगवान राम का पहला बड़ा पड़ाव था।
    • यहाँ भगवान राम ने महर्षि भारद्वाज से आगे के मार्ग के लिए मार्गदर्शन प्राप्त किया था।
    • महर्षि ने ही उन्हें चित्रकूट में निवास करने की सलाह दी थी।


  • महर्षि वाल्मीकि तपोस्थली चित्रकूट प्रमुख द्वार लालापुर वर्तमान में यह स्थान उत्तर प्रदेश के लालापुर (चित्रकूट के समीप) में स्थित है।


    • चित्रकूट पहुंचने से पहले प्रभु राम ने महर्षि वाल्मीकि के इस आश्रम में भेंट की थी।
    • रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि ने ही उन्हें कामदगिरि पर्वत के पास कुटिया बनाने का सुझाव दिया था।

  •  चित्रकूट  वर्तमान में यह स्थान  मध्य प्रदेश में स्थित है।
    • चित्रकूट में भगवान श्री राम ने रहने के लिए पर्णकुटीर बनाई ।
    • राम-भरत  मिलाप भी चित्रकूट में ही हुआ।
    • भगवान राम अपनी चरण पादुका देकर भरत को अयोध्या लौटा दिया ।


  • सती अनुसूया मंदिर वर्तमान मध्य प्रदेश के चित्रकूट वन क्षेत्र में यह पवित्र स्थान महर्षि अत्रि और सती अनुसूया का आश्रम है।
    • चित्रकूट से विदा लेते समय राम, सीता और लक्ष्मण यहाँ आए थे।


  • शरभङ्ग आश्रम यह आश्रम मध्य प्रदेश के सतना जिले के घने जंगलों में स्थित है, जहाँ से दंडकारण्य का मूल क्षेत्र शुरू होता है।
  • महर्षि शरभंग ने भगवान राम के दर्शन के लिए ही अपने प्राण रोक रखे थे।
  • राम जी के दर्शन करने के बाद उन्होंने योग अग्नि में अपनी देह त्याग दी थी।


  • सुतीक्ष्ण आश्रम यह आश्रम भी वर्तमान मध्य प्रदेश (सतना/पन्ना सीमा के पास) के दंडक वन क्षेत्र में स्थित है।
    • महर्षि सुतीक्ष्ण, अगस्त्य मुनि के परम शिष्य थे।
    • उन्होंने भगवान राम का भव्य स्वागत किया और उन्हें अपने गुरु अगस्त्य मुनि से मिलने की प्रेरणा दी।


  • महामुनि अगस्त्य ऋषि आश्रम, अकोला वर्तमान महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले (अकोले/भंडारदरा के पास) में यह महान आश्रम स्थित है।
    • यहीं महर्षि अगस्त्य ने भगवान राम को भगवान विष्णु का धनुष, अमोघ बाण और दिव्य खड्ग प्रदान किया था।
    • अगस्त्य मुनि के सुझाव पर ही राम जी ने आगे पंचवटी में निवास करने का निर्णय लिया था।


  • पंचवटी महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह स्थान वनवास का एक और प्रमुख केंद्र रहा।

    • यहीं शूर्पणखा की नाक काटी गई थी और खर-दूषण के साथ युद्ध हुआ था।
    • रावण द्वारा माता सीता का छलपूर्वक हरण भी इसी स्थान से हुआ था।


  • मातंग महर्षि आश्रम कर्नाटक के हम्पी (प्राचीन किष्किंधा) के पास ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित यह आश्रम शबरी की कथा से जुड़ा है।


    • मतंग ऋषि की शिष्या माता शबरी ने यहीं भगवान राम को अपने जूठे बेर खिलाए थे।
    • इसी क्षेत्र में राम जी की भेंट हनुमान जी और सुग्रीव से हुई थी।


  • ऋष्यमूक पर्वत पर स्थित 'किष्किंधा' वानरों का एक प्रसिद्ध राज्य था, जिस पर पहले बालि और बाद में सुग्रीव ने शासन किया। भौगोलिक रूप से इसे वर्तमान समय में कर्नाटक के हंपी (विजयनगर) क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता है, जो तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित है।

    • राम-सुग्रीव मित्रता: यहीं भगवान राम और हनुमान जी की सुग्रीव से भेंट हुई थी।
    • बालि वध: श्री राम ने बाली का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा बनाया था।
    • सीता खोज: यहीं से वानर सेना को चारों दिशाओं में सीता जी की खोज के लिए भेजा गया था।

  • रामेश्वरम दक्षिण भारत के तमिलनाडु में समुद्र तट पर स्थित यह स्थान लंका प्रस्थान का अंतिम बिंदु है।
    • गंधमादन पर्वत (रामेश्वरम, तमिलनाडु) एक प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक पहाड़ी है। इसे 'रामर पादम' भी कहते हैं। यहाँ भगवान श्रीराम के पैरों के चिह्न एक चक्र पर अंकित हैं, जिनका दर्शन करने देश-विदेश से भक्त आते हैं। मान्यता है कि यहीं से हनुमान जी ने लंका के लिए छलांग लगाई थी। 
    • यहीं भगवान राम ने भगवान शिव की आराधना कर रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।
    • यहीं से नल और नील के नेतृत्व में वानर सेना ने लंका तक राम सेतु का निर्माण किया था।

11 August 2026

| AadityaHriday Stotra |

AadityaHriday Stotra
‘आदित्यहृदय स्तोत्र’
विनियोग

ॐ अस्य आदित्य हृदयस्तोत्रस्यागस्त्यऋषिरनुष्टुपछन्दः, आदित्यहृदयभूतो

भगवान ब्रह्मा देवता निरस्ताशेषविघ्नतया ब्रह्मविद्यासिद्धौ सर्वत्र जयसिद्धौ च विनियोगः।

ऋष्यादिन्यास

ॐ अगस्त्यऋषये नमः, शिरसि। अनुष्टुपछन्दसे नमः, मुखे। आदित्यहृदयभूतब्रह्मदेवतायै नमः हृदि।

ॐ बीजाय नमः, गुह्ये। रश्मिमते शक्तये नमः, पादयो:। ॐ तत्सवितुरित्यादिगायत्रीकीलकाय नमः नाभौ।

करन्यास

ॐ रश्मिमते अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ समुद्यते तर्जनीभ्यां नमः।

ॐ देवासुरनमस्कृताय मध्यमाभ्यां नमः। ॐ विवस्‍वते अनामिकाभ्यां नमः।

ॐ भास्कराय कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ भुवनेश्वराय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।

हृदयादि अंगन्यास

ॐ रश्मिमते हृदयाय नमः। ॐ समुद्यते शिरसे स्वाहा। ॐ देवासुरनमस्कृताय शिखायै वषट्।

ॐ विवस्वते कवचाय हुम्। ॐ भास्कराय नेत्रत्रयाय वौषट्। ॐ भुवनेश्वराय अस्त्राय फट्।

इस प्रकार न्यास करके निम्नांकित मंत्र से भगवान सूर्य का ध्यान एवं नमस्कार करना चाहिए-

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

आदित्यहृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌ ।

रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌ ॥1॥

दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌ ।

उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा ॥2॥

उधर श्री रामचन्द्रजी युद्ध से थककर चिन्ता करते हुए रणभूमि में खड़े थे। इतने में रावण भी युद्ध के लिए उनके सामने उपस्थित हो गया। यह देख भगवान अगस्त्य मुनि, जो देवताओं के साथ युद्ध देखने के लिए आये थे, श्रीराम के पास जाकर बोले।

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌ ।

येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे ॥3॥

‘सबके हृदय में रमण करने वाले महाबाहो राम ! यह सनातन गोपनीय स्तोत्र सुनो। वत्स ! इसके जप से तुम युद्ध में अपने समस्त शत्रुओं पर विजय पा जाओगे।’

आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌ ।

जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌ ॥4॥

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌ ।

चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌ ॥5॥

‘इस गोपनीय स्तोत्र का नाम है ‘आदित्यहृदय’। यह परम पवित्र और सम्पूर्ण शत्रुओं का नाश करने वाला है। इसके जप से सदा विजय की प्राप्ति होती है। यह नित्य अक्ष्य और परम कल्याणमय स्तोत्र है। सम्पूर्ण मंगलों का भी मंगल है। इससे सब पापों का नाश हो जाता है। यह चिन्ता और शोक को मिटाने तथा आयु को बढ़ाने वाला उत्तम साधन है।’

रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌ ।

पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌ ॥6॥

‘भगवान सूर्य अपनी अनन्त किरणों से सुशोभित (रश्मिमान्) हैं। ये नित्य उदय होने वाले (समुद्यन्), देवता और असुरों से नमस्कृत, विवस्वान् नाम से प्रसिद्ध, प्रभा का विस्तार करने वाले (भास्कर) और संसार के स्वामी (भुवनेश्वर) हैं। तुम इनका (रश्मिमते नमः, समुद्यते नमः, देवासुरनमस्कताय नमः, विवस्वते नमः, भास्कराय नमः, भुवनेश्वराय नमः इन नाम मंत्रों के द्वारा) पूजन करो।’

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावन: ।

एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभि: ॥7॥

‘सम्पूर्ण देवता इन्हीं के स्वरूप हैं। ये तेज की राशि तथा अपनी किरणों से जगत को सत्ता एवं स्फूर्ति प्रदान करने वाले हैं। ये ही अपनी रश्मियों का प्रसार करके देवता और असुरों सहित सम्पूर्ण लोकों का पालन करते हैं।’

एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिव: स्कन्द: प्रजापति: । महेन्द्रो धनद: कालो यम: सोमो ह्यापां पतिः ॥8॥

पितरो वसव: साध्या अश्विनौ मरुतो मनु: । वायुर्वहिन: प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकर: ॥9॥

‘ये ही ब्रह्मा, विष्णु, शिव, स्कन्द, प्रजापति, इन्द्र, कुबेर, काल, यम, चन्द्रमा, वरूण, पितर, वसु, साध्य, अश्विनीकुमार, मरुदगण, मनु, वायु, अग्नि, प्रजा, प्राण, ऋतुओं को प्रकट करने वाले तथा प्रभा के पुंज हैं।’

आदित्य: सविता सूर्य: खग: पूषा गभस्तिमान्‌ ।

सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकर: ॥10॥

हरिदश्व: सहस्त्रार्चि: सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌ ।

तिमिरोन्मथन: शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌ ॥11॥

हिरण्यगर्भ: शिशिरस्तपनोऽहस्करो रवि: ।

अग्निगर्भोऽदिते: पुत्रः शंखः शिशिरनाशन: ॥12॥

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजु:सामपारग: ।

घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥13॥

आतपी मण्डली मृत्यु: पिगंल: सर्वतापन:।

कविर्विश्वो महातेजा: रक्त:सर्वभवोद् भव: ॥14॥

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावन: ।

तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते ॥15॥

‘इन्हीं के नाम आदित्य (अदितिपुत्र), सविता (जगत को उत्पन्न करने वाले), सूर्य (सर्वव्यापक), खग (आकाश में विचरने वाले), पूषा (पोषण करने वाले), गभस्तिमान् (प्रकाशमान), सुर्वणसदृश, भानु (प्रकाशक), हिरण्यरेता (ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के बीज), दिवाकर (रात्रि का अन्धकार दूर करके दिन का प्रकाश फैलाने वाले), हरिदश्व (दिशाओं में व्यापक अथवा हरे रंग के घोड़े वाले), सहस्रार्चि (हजारों किरणों से सुशोभित), तिमिरोन्मथन (अन्धकार का नाश करने वाले), शम्भू (कल्याण के उदगमस्थान), त्वष्टा (भक्तों का दुःख दूर करने अथवा जगत का संहार करने वाले), अंशुमान (किरण धारण करने वाले), हिरण्यगर्भ (ब्रह्मा), शिशिर (स्वभाव से ही सुख देने वाले), तपन (गर्मी पैदा करने वाले), अहरकर (दिनकर), रवि (सबकी स्तुति के पात्र), अग्निगर्भ (अग्नि को गर्भ में धारण करने वाले), अदितिपुत्र, शंख (आनन्दस्वरूप एवं व्यापक), शिशिरनाशन (शीत का नाश करने वाले), व्योमनाथ (आकाश के स्वामी), तमोभेदी (अन्धकार को नष्ट करने वाले), ऋग, यजुः और सामवेद के पारगामी, घनवृष्टि (घनी वृष्टि के कारण), अपां मित्र (जल को उत्पन्न करने वाले), विन्ध्यीथीप्लवंगम (आकाश में तीव्रवेग से चलने वाले), आतपी (घाम उत्पन्न करने वाले), मण्डली (किरणसमूह को धारण करने वाले), मृत्यु (मौत के कारण), पिंगल (भूरे रंग वाले), सर्वतापन (सबको ताप देने वाले), कवि (त्रिकालदर्शी), विश्व (सर्वस्वरूप), महातेजस्वी, रक्त (लाल रंगवाले), सर्वभवोदभव (सबकी उत्पत्ति के कारण), नक्षत्र, ग्रह और तारों के स्वामी, विश्वभावन (जगत की रक्षा करने वाले), तेजस्वियों में भी अति तेजस्वी तथा द्वादशात्मा (बारह स्वरूपों में अभिव्यक्त) हैं। (इन सभी नामों से प्रसिद्ध सूर्यदेव !) आपको नमस्कार है।’

नम: पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नम: ।

ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नम: ॥16॥

‘पूर्वगिरी उदयाचल तथा पश्चिमगिरि अस्ताचल के रूप में आपको नमस्कार है। ज्योतिर्गणों (ग्रहों और तारों) के स्वामी तथा दिन के अधिपति आपको प्रणाम है।’

जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नम: ।

नमो नम: सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नम: ॥17॥

‘आप जय स्वरूप तथा विजय और कल्याण के दाता है। आपके रथ में हरे रंग के घोड़े जुते रहते हैं। आपको बारंबार नमस्कार है। सहस्रों किरणों से सुशोभित भगवान सूर्य ! आपको बारंबार प्रणाम है। आप अदिति के पुत्र होने  के कारण आदित्य नाम से प्रसिद्ध है, आपको नमस्कार है।’

नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नम: ।

नम: पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥18॥

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे ।

भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नम: ॥19॥

‘(परात्पर रूप में) आप ब्रह्मा, शिव और विष्णु के भी स्वामी हैं। सूर आपकी संज्ञा हैं, यह सूर्यमण्डल आपका ही तेज है, आप प्रकाश से परिपूर्ण हैं, सबको स्वाहा कर देने वाला अग्नि आपका ही स्वरूप है, आप रौद्ररूप धारण करने वाले हैं, आपको नमस्कार है।’

तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने ।

कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम: ॥20॥

‘आप अज्ञान और अन्धकार के नाशक, जड़ता एवं शीत के निवारक तथा शत्रु का नाश करने वाले हैं, आपका स्वरूप अप्रमेय है। आप कृतघ्नों का नाश करने वाले, सम्पूर्ण ज्योतियों के स्वामी और देवस्वरूप हैं, आपको नमस्कार है।’

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे ।

नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥21॥

‘आपकी प्रभा तपाये हुए सुवर्ण के समान है, आप हरि (अज्ञान का हरण करने वाले) और विश्वकर्मा (संसार की सृष्टि करने वाले) हैं, तम के नाशक, प्रकाशस्वरूप और जगत के साक्षी हैं, आपको नमस्कार है।’

नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभु: ।

पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभि: ॥22॥

‘रघुनन्दन ! ये भगवान सूर्य ही सम्पूर्ण भूतों का संहार, सृष्टि और पालन करते हैं। ये ही अपनी किरणों से गर्मी पहुँचाते और वर्षा करते हैं।’

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठित: ।

एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌ ॥23॥

‘ये सब भूतों में अन्तर्यामीरूप से स्थित होकर उनके सो जाने पर भी जागते रहते हैं। ये ही अग्निहोत्र तथा अग्निहोत्री पुरुषों को मिलने वाले फल हैं।’

देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च ।

यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभु: ॥24॥

‘(यज्ञ में भाग ग्रहण करने वाले) देवता, यज्ञ और यज्ञों के फल भी ये ही हैं। सम्पूर्ण लोकों में जितनी क्रियाएँ होती हैं, उन सबका फल देने में ये ही पूर्ण समर्थ हैं।’

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च ।

कीर्तयन्‌ पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव ॥25॥

‘राघव ! विपत्ति में, कष्ट में, दुर्गम मार्ग में तथा और किसी भय के अवसर पर जो कोई पुरुष इन सूर्यदेव का कीर्तन करता है, उसे दुःख नहीं भोगना पड़ता।’

पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्।

एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि ॥26॥

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’

अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि ।

एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌ ॥27॥

‘महाबाहो ! तुम इसी क्षण रावण का वध कर सकोगे।’ यह कहकर अगस्त्य जी जैसे आये थे, उसी प्रकार चले गये।

एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा ॥

धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌ ॥28॥

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌ ।

त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌ ॥29॥

रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌ ।

सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌ ॥30॥

उनका उपदेश सुनकर महातेजस्वी श्रीरामचन्द्रजी का शोक दूर हो गया। उन्होंने प्रसन्न होकर शुद्धचित्त से आदित्यहृदय को धारण किया और तीन बार आचमन करके शुद्ध हो भगवान सूर्य की ओर देखते हुए इसका तीन बार जप किया। इससे उन्हें बड़ा हर्ष हुआ। फिर परम पराक्रमी रघुनाथजी ने धनुष उठाकर रावण की ओर देखा और उत्साहपूर्वक विजय पाने के लिए वे आगे बढ़े। उन्होंने पूरा प्रयत्न करके रावण के वध का निश्चय किया।

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमना: परमं प्रहृष्यमाण: ।

निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥31॥

उस समय देवताओं के मध्य में खड़े हुए भगवान सूर्य ने प्रसन्न होकर श्रीरामचन्द्रजी की ओर देखा और निशाचराज रावण के विनाश का समय निकट जानकर हर्षपूर्वक कहा ‘रघुनन्दन ! अब जल्दी करो’।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

इति श्रीवाल्मीकीये रामायणे युद्धकाण्डे अगस्‍त्‍यप्रोक्‍तमादित्‍यहृदयस्‍तोत्रं सम्‍पूर्णम्

11 May 2026

Mother's Day

Mother's Day

आओ जाने Mother's Day क्यों मनाया जाता है। .......

मदर्स दे (मातृ दिवस) का आयोजन अमेरिका में ग्राफटन वेस्ट वर्जिनिया में "एना जार्विस" के द्वारा आरम्भ किया गया था। । उन्होंने 10 मई, 1908 को वर्जीनिया के एक चर्च में पहला मदर्स डे मनाया गया, जिसे 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मई के दूसरे रविवार को राष्ट्रीय अवकाश (अमेरिका का) के रूप में घोषित किया।

 मदर्स दे (मातृ दिवस) अनाथ बच्चों के प्रति समाज की कुछ विशेष वर्ग की महिलाओं द्वारा ममत्व दिखाने का दिन है जो अनाथ बच्चे होते हैं उन्हें इस दिन अपनी 1 दिन की वात्सल्य देने वाली मां के लिए अति प्रेम रहता है सामान्यता यह दिन यूरोप अमेरिका में ही मनाया जाता है यानि एक दिन की माँ के सम्मान में मनाया जाता है | 

अब बिना बुद्धि लगाए हमारे कुछ भारतीय साथी  मदर डे मना रहे है और खूब स्टेटस लगा रहे  हैं , उन्हें भारत  पाश्चात्य समाज  संरंचना  ज्ञान है नहीं भेड़ चाल चलने में माहिर , इस पोस्ट  पढ़कर मुझे जरूर कोसेंगे , हमारे यहां परिवार , रिश्ते नाते एक बहुत ही समृद्ध ढांचा है जो पश्चिमी देशों  में देखने को नहीं मिलता 

भारतीय महाद्वीप में इस तरह का कोई दिन नहीं है भारतीय लोग सदा अपने मां बाप की छत्रछाया में रहते हैं , भारतीय लोगों के लिए मां से प्रेम या पिता से प्रेम सदैव ही आजीवन अकल्पनीय एवं अद्भुत रहा है 

                  - रमेश खोला , ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष नवमी साल 2083 ( ग्रेगोरियन कैलेंडर अनुसार 11 मई 2026) 

30 December 2025

24 December 2025

securedemployeeharyana


हरियाणा अनुबंध कर्मचारी (सेवा सुरक्षा) नियम, 2025




Letter 21.07.2026 



Date extended up to 15 April
Date Extended



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FAQ ( For Ask Questions )
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 





पोर्टल शुभारम्भ : 25 दिसम्बर 2025
साभार : दैनिक भास्कर 25.12.2025





03 October 2025

Haryana Govt. Panel Hospitals List

List of Private Medical Colleges/Hospitals Empaneled with Government of Haryana

District Wise List of Empanelled Hospitals in Haryana
                         Bhiwani 
                                                  Charkhi Dadri 
                                                                                       Faridabad 
                                                                                                                   Fatehabad
                                                                                                                                               Gurugram
                   Jhajjar
                                        Jind
                                                          Kaithal
                                                                                 Karnal
                                                                                               Kurukshetra
                                                                                                                                        Mahendragarh
Nuh 
              Palwal
                                  Panchkula
                                                           Panipat
                                                                                Rewari
                                                                                                      Rohtak
                                                                                                                             Sirsa
                                                                                                                                              Sonipat


List of Empanelled Hospitals outside of Haryana










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New List Haryana
As on 29 May 2022

Ambala , Bhiwani
Charkhi Dadari , Faridabad , Fatehabad , Gurugram
Gurugram , Hisar
Hisar , Jhajjar
Jhajjar , Jind, Kaithal ,Karnal
Karnal . Kurukshtra , Mahender Garh , Palwal , Panchkula
Panchkula , Panipat , Rewari
Rewari , Rohtak , Sirsa
Sirsa , Sonipat , Yamunanagar
Yamunanagar (Hr) , Rajasthan , Uttar Pradesh , Punjab
Punjab , New Delhi
New Delhi
New Delhi , Chandigarh 

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As on July 2020
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   हरियाणा पैनल हॉस्पिटल लिस्ट (16.04.2018 )

 Medical cashless for Govt. Employees

          Haryana Govt. Penal Hospitals List

सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए एनएबीएच प्रमाणित 11 और अस्पतालों को पैनल में लिया गया है। अब ऐसे अस्पतालों की संख्या 67 हो गई है जहां कर्मचारी मुफ्त इलाज करा सकेंगे

                                                            OLD Letter

सरकारी पैनल में शामिल हुए 11 नए अस्पताल
#NEWS UPDATE DATE 15.11.2017#
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चंडीगढ़ : सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के लिए एनएबीएच प्रमाणित 11 और अस्पतालों को पैनल में लिया गया है। अब ऐसे अस्पतालों की संख्या 67 हो गई है जहां कर्मचारी मुफ्त इलाज करा सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बताया कि सिग्नस अस्पताल कुरुक्षेत्र, सिग्नस अस्पताल नई दिल्ली, आइआरसीसी अस्पताल पंचकूला, गुरु हरकिशन साहिब अस्पताल सोहना, पार्क अस्पताल पानीपत, आहुजा आइ एंड डेंटल इंस्टीट्यूट गुरुग्राम, ग्रेसियन अस्पताल मोहाली, मंगलम डायग्नोस्टिक हिसार, कोलंबिया एशिया अस्पताल पटियाला, इंडस सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल मोहाली और मूलचंद अस्पताल नई दिल्ली को पूल में शामिल किया गया है। पहले से पैनल में शामिल सभी अस्पतालों को भी एनएबीएच से प्रमाणित कराने के लिए दो साल का समय दिया गया है।
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Nodal Officer  Secondary Education 
Nodal Officer :  Smt. Om Pati ( Registrar , Secondary Education )
Address :          R. No. 308, 3rd Floor, O/o Director Secondary Education, 
                           Shiksha Sadan, Sector 5, Panchkula
Contact No :      9417868974 
email :                nodalofficersecondary@gmail.com
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