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|| A warm welcome to you, for visiting this website - RAMESH KHOLA || || "बुद्धिहीन व्यक्ति पिशाच अर्थात दुष्ट के सिवाय कुछ नहीं है"- चाणक्य ( कौटिल्य ) || || "पुरुषार्थ से दरिद्रता का नाश होता है, जप से पाप दूर होता है, मौन से कलह की उत्पत्ति नहीं होती और सजगता से भय नहीं होता" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "एक समझदार आदमी को सारस की तरह होश से काम लेना चाहिए, उसे जगह, वक्त और अपनी योग्यता को समझते हुए अपने कार्य को सिद्ध करना चाहिए" - चाणक्य (कौटिल्य ) || || "कुमंत्रणा से राजा का, कुसंगति से साधु का, अत्यधिक दुलार से पुत्र का और अविद्या से ब्राह्मण का नाश होता है" - विदुर || || सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास - गोस्वामी तुलसीदास (श्रीरामचरितमानस, सुंदरकाण्ड, दोहा संख्या 37) || || जब आपसे बहस (वाद-विवाद) करने वाले की भाषा असभ्य हो जाये, तो उसकी बोखलाहट से समझ लेना कि उसका मनोबल गिर चुका है और उसकी आत्मा ने हार स्वीकार कर ली है - रमेश खोला ||

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17 December 2013

Hanuman Chalisha

"श्री हनुमान चालीसा"

Video 
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॥दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥
॥चौपाई॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर              ॥1॥

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा                ॥2॥

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी            ॥3॥

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा               ॥4॥
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै                        ॥5॥

शंकर स्वयं केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन                 ॥6॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर                  ॥7॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया               ॥8॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा               ॥9॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे                     ॥10॥

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये                    ॥11॥

रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई           ॥12॥

सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं             ॥13॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा                 ॥14॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते            ॥15॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना              ॥16॥

तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना           ॥17॥

लील्यो ताहि मधुर फल जानू            ॥18॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं         ॥19॥

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते               ॥20॥

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे                 ॥21॥

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना              ॥22॥

आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै                  ॥23॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै                 ॥24॥

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा             ॥25॥

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै          ॥26॥

सब पर राम राय सिर ताजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा          ॥27॥

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै            ॥28॥

चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा               ॥29॥

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे              ॥30॥

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता              ॥31॥

राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सादर हो रघुपति के दासा               ॥32॥

तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै          ॥33॥

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई            ॥34॥

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई            ॥35॥

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा            ॥36॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं            ॥37॥

यह सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई           ॥38॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा             ॥39॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा            ॥40॥

॥दोहा॥

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

15 December 2013

PGT Appointment in Haryana

#Dainik Bhaskar Clip
                                                       साभार : प्रिंट मिडिया एवं सोशल मिडिया 

06 December 2013

01 November 2013

Haryana Police Recruitment Board (HPRB) Pachkula , 1347 Constables (GD Recruitment 2013

Haryana Police Recruitment Board (HPRB) Constables (General Duty) Recruitment 2013


Haryana Police at www.freenokrinews.comHaryana Police Recruitment Board (HPRB),Panchkula
Recruitment of Constables (General Duty) in Haryana Police Against Ex- Servicemen Category

Advertisement No.1/2013 dated 01.11.2013
Constables (General Duty)-1347 Posts
For General 674,for SC 192, for BCA 192,for BCB 289 Posts.
Reservation : Reservation as per govt. rules.
Pay Scale-5200-20200+ Grade pay 2000/-
Educational qualification: Passed 10+2 examination.
How to apply-Apply on prescribed format of application.Format given in detailed advertisement.
Address for application : Haryana Police Recruitment Board,Bays No.31-32,Sactor -04,Panchkula, Haryana .PIN-134112.
Last date of application-02.12.2013.Applications received after due date will not be accepted.
Application Fee-No application fee for ESM candidates,but their dependents are required to pay the fee as for General,SC or BC candidates.Application fee is 100/-
Selection Process-
Physical Measurement + Physical Efficiency Test + Interview.
Persons less in height and chest are suggested not to apply for these posts.
Merit list will be prepared on the base of Physical Efficiency Test + Interview.
Detail Published in Dainik Tribune News Paper on dated 01.11.2013.


31 October 2013

Some Usefull Tips for everyone

 युक्तियाँ (Tips) :---

1. चैत्र माह में नया गुड़ न खाएं

2. बैसाख माह में नया तेल न लगाएं
3. जेठ माह में दोपहर में न चलना चाहिए
4. अषाढ़ माह में पका बेल न खाएं
5. सावन माह में साग न खाएं
6. भादों माह में दही न खाएं
7. क्वार माह में करेला न खाएं
8. कार्तिक माह में जमीन पर न सोएं
9. अगहन माह में जीरा न खाएं
10. पूस माह में धनिया न खाएं
11. माघ माह में मिश्री न खाएं
12. फागुन माह में चना न खाएं

अन्य युक्तियाँ ( More Tips ):---
1. स्नान के पहले और भोजन के बाद पेशाब जरूर करें ।
2. भोजन के बाद कुछ देर बायी करवट लेटना चाहिये ।
3. रात को जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठाना चाहिये।
4. प्रातः पानी पीकर ही शौच के लिए जाना चाहिये ।
5. सूर्योदय के पूर्व गाय का धारोष्ण दूध पीना चाहिये
6. व्यायाम के बाद दूध अवश्य पियें।
7. मल, मूत्र, छीक का वेग नही रोकना चाहिये ।
8. ऋतु (मौसमी) फल खाना चाहिये..
रसदार फलों के अलावा  अन्य फल भोजन के बाद खाना चाहिये..
रात्रि में फल नहीं खाना चाहिये ।
9. भोजन करते समय जल कम से कम पियें ।भोजन के पश्चात् कम से कम 45 मिनट के बाद जल पीना चाहिए
10. नेत्रों में सुरमा / काजल अवस्य लगायें.स्नान रोजाना अवश्य करना चाहिये ।
11. सूर्य की ओर मुह करके पेशाब न करें.बरगद, पीपल, देव मन्दिर, नदी व् शमशान में पेशाब न करें ।
12. भोजन के समय क्रोध न करें बल्कि प्रसन्न रहें। आवश्यकता से अधिक बोलना भी नहीं चाहिये व
बोलते समय भोजन करना रोक दें
13. ईश्वर आराधना अवश्य करनी चाहिय

27 October 2013

world first aeroplane ( made in India )



अगर आज किसी को पूछा जाये के सबसे पहला हवाई जाहाज किसने बनाया?
तो ले देके हम सब एक नाम लेते है Write Brothers ने बनाया और उनके नाम से दर्ज है यह अविष्कार| हम बचपन से यह पढ़ते आये है के 17 दिसंबरसन 1903 को अमेरिका के कैरोलिना के समुद्र तट पर Write Brothers ने पहला हवाई जाहाज बना कर उड़ाया जो 120 फिट उड़ा और गिर गया| और उसके बाद फिर आगे हवाई जाहाज की कहानी शुरू होती है| 

लेकिन पर अभी दस्तावेज़ मिले है और वो यह बताते है के 1903 से कई साल पहले सन 1895 मे हमारे देश के एक बहुत बड़े विमान वैज्ञानिक ने हवाई जाहाज बनाया और मुंबई के चौपाटी के समुद्रतट पर उड़ाया और वो 1500 फिट ऊपर उड़ा और उसके बाद नीचे आया !

जिस भारतीय वैज्ञानिक ने यह करामात की उनका नाम था “शिवकर बापूजी तलपडे” वे मराठी व्यक्ति थे| मुंबई मे एक छोटा सा इलाका है जिसको चिर बाज़ार कहते है, वहाँ उनका जन्म हुआ और पढ़ाई लिखाई की ! एक गुरु के सान्निध्य मे रहके संस्कृत साहित्य का अध्यन किया| अध्यन करते समय उनकी विमान शास्त्र मे रूचि पैदा हो गयी| आपको जानकर हैरानी होगी की भारत मे तो विमान बनाने पर पूरा एक शस्त्र लिखा गया है उसका नाम है विमानशास्त्र ! और हमारे देश मे विमान शास्त्र के जो सबसे बड़े वैज्ञानिक माने जाते है वो है “महर्षि भरद्वाज” | महर्षि भरद्वाज ने विमान शास्त्र की सबसे पहली पुस्तक लिखी, उस पुस्तक के आधार पर फिर सेकड़ो पुस्तकें लिखी गयी| भारत मे जो पुस्तक उपलब्ध है उसमे सबसे पुरानी पुस्तक 1500 साल पुरानी है और महर्षि भरद्वाज तो उसके भी बहुत साल पहले हुए|

शिवकर बापूजी तलपडे जी के हाथ मे महर्षि भरद्वाज के विमान शास्त्र की पुस्तक लग गयी और इस पुस्तक को आद्योपांत उन्होंने पड़ा| इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी ने कुछ रोचक बातें कहीं है जैसे –

> “इस पुस्तक के आठ अध्याय मे विमान बनाने की तकनिकी का ही वर्णन है”

> “आठ अध्याय मे 100 खंड है जिसमे विमान बनाने की टेक्नोलॉजी का वर्णन है”

> “महर्षि भरद्वाज ने अपनी पूरी पुस्तक मे विमान बनाने के 500 सिद्धांत लिखे है”

एक सिद्धांत (Principle) होता है जिसमे एक इंजन बन जाता है और पूरा विमान बन जाता है, और ऐसे 500 सिद्धांत लिखे है महर्षि भरद्वाज ने !! अर्थात मने 500 तरह के विमान बनाये जा सकते है हर एक सिद्धांत पर|

इस पुस्तक के बारे मे तलपडे जी और लिखते है के –

> “इन 500 सिद्धांतो के 3000 श्लोक है विमान शास्त्र मे”

यह तो (Technology) तकनिकी होती है इसका एक (Process) प्रक्रिया होती है, और हर एक तकनिकी के एक विशेष प्रक्रिया होती है तो महर्षि भरद्वाज ने 32 प्रक्रियाओं का वर्णन किया है| माने 32 तरह से 500 किसम के विमान बनाए जा सकते है मतलब 32 तरीके है 500 तरह के विमान बनाने के; मने एक विमान बनाने के 32 तरीके, 2 विमान बनाने के 32 तरीके; 500 विमान बनाने के 32 तरीके उस पुस्तक ‘विमान शास्त्र’ मे है| 3000 श्लोक है 100 खंड है और 8 अध्याय है| आप सोचिये यह किनता बड़ा ग्रन्थ है!

इस ग्रन्थ को शिवकर बापूजी तलपडे जी ने पड़ा अपनी विद्यार्थी जीवन से पढ़ा , और पढ़ पढ़ कर परिक्षण किये, और परिक्षण करते करते 1895 मे वो सफल हो गए और उन्होंने पहला विमान बना लिया और उसको उड़ा कर भी दिखाया| इस परिक्षण को देखने के लिए भारत के बड़े बड़े लोग गए| हमारे देश के उस समय के एक बड़े व्यक्ति हुआ करते थे ‘महादेव गोविन्द रानाडे’ जो अंग्रेजी न्याय व्यवस्था मे जज की हैसियत से काम किया करते थे मुम्बई हाई कोर्ट मे,! तो रानाडे जी गए उसको देखने के लिए| बड़ोदरा के एक बड़े राजा हुआ करते थे ‘गायकोवाड’ नाम के तो वो गए उसको देखने के लिए| ऐसे बहुत से लोगों के सामने और हजारो साधारण लोगों की उपस्थिति मे शिवकर बापूजी तलपडे ने अपना विमान उड़ाया|

और हैरानी की बात यह थी जिस विमान को उन्होंने उड़ाया उसमे खुद नही बैठे, बिना चालक के उड़ा दिया उसको| मने उस विमान को उड़ाया होगा पर कण्ट्रोल सिस्टम तलपडे जी के हाथ मे है और विमान हवा मे उड़ रहा है और यह घटना 1895 मे हुआ | जबकि बिना चालक के उड़ने वाला विमान 2 -3 साल पहले अमेरिका ने बनाया है जिसे ड्रोन कहते है और भारत मे सन 1895 मे लगभग 110 साल पहले तलपड़े जी ने ये बना दिया था ! और उस विमान को उड़ाते उड़ाते 1500 फिट तक वो लेके गए फिर उसके बाद उन्होंने उसको उतारा, और बहुत स्वकुशल उतारकर विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया| माने वो विमान टुटा नही, उसमे आग लगी नही उसके साथ कोई दुर्घटना हुई नही, वो उड़ा 1500 फिट तक गया फिर निचे कुशलता से उतरा और सारी भीड़ ने तलपडे जी को कंधे पर उठा लिया| महाराजा गायकोवाड जी ने उनके लिए इनाम की घोषणा की, एक जागीर उनके लिए घोषणा कर दी और गोविन्द रानाडे जी जो थे उन्होंने घोषणा की, बड़े बड़े लोगों ने घोषनाये ईनाम की घोषनाये की |

COMPUTER

Fix Windows Photo viewer Can't Display Image Because of Not enough Memory

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FULL FORMS

  Wi Fi = Wireless Fidelity
  XML = Extensible Markup Language
  ARPANET = Advanced Research


                                                                 Projects Agency Network
                                                           ASCII = American Standard Code 
For Information Interchange
                                                                                   AVI = Audio Video Interleave
                                                                                    RTS = Real Time Streaming
                                                                                  BHTML = Broadcast Hyper Text

Markup Language

 SIS = Symbian OS Installer File
 AMR = Adaptive Multi-Rate Codec
 JAD = Java Application Descriptor
JAR = Java Archive
 JAD = Java Application Descriptor
 3GPP = 3rd Generation Partnership
  
                                                                                               Project
                                                                               3GP = 3rd Generation Project
                                                                                      MP3 = MPEG player lll
                                                                                    MP4 = MPEG-4 video file
                                                                               AAC = Advanced Audio Coding
                                                                          GIF = Graphic Interchangeable 
Format
                                                                         JPEG = Joint Photographic Expert Group
                                                                                            BMP = Bitmap
                                                                                   SWF = Shock Wave Flash
                                                                              WMV = Windows Media Video
                                                                               WMA = Windows Media Audio
                                                                                    WAV = Waveform Audio
                                                                            PNG = Portable Network Graphics
                                                                        DOC = Document (Microsoft 
Corporation )
                                                                               PDF = Portable Document Format
                                                                                      M3G = Mobile 3D Graphics
                                                                                      M4A = MPEG-4 Audio File
                                                                                   NTH = Nokia Theme (series 40)
                                                                                    THM = Themes (SonyEricsson)
                                                                          MMF = Synthetic Music Mobile 
Application File
                                                                                           NRT = Nokia Ringtone
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                                                                 Run Command 


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विंडोज का पासवर्ड तोड़ने के तरीके हैं-
स्टेप 1- पहले अपना कम्प्यूटर लॉगइन कीजिए और Ctrl+Alt+Delete+Delete बटन क्लिक कीजिए।
स्टेप 2- जैसे ही क्लासिक लॉगइन बॉक्स आए उसमें एडमिन के यूजरनेम और पासवर्ड बॉक्स को खाली छोड़ दें।
स्टेप 3- अब आप अपने विंडोज कम्प्यूटर पर आसानी से लॉगइन कर सकते हैं। एक बार लॉगइन होते ही अपने सिस्टम का पासवर्ड चेंज कर दें। 

19 August 2013

Gumnami Baba



20.09.2017 DAINIK JAGRAN NEWS CLIP


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फैजाबाद (यूपी).गुमनामी बाबा के आखि‍री बक्से से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की फैमि‍ली फोटोज मिली हैं। साथ ही तीन घड़ियां- रोलेक्स, ओमेगा और क्रोनो मीटर सहि‍त तीन सिगार केश मिले हैं। एक फोटो में बोस के पिता जानकी नाथ, मां प्रभावती देवी, भाई-बहन और पोते-पोती नजर आ रहे हैं। हालांकि, क्या गुमनामी बाबा ही नेताजी थे, इस बात को लेकर मिस्ट्री अब भी कायम है।

 बोस की फैमिली फोटोज में कौन-कौन...
- फोटो में सुभाष चंद्र बोस की फैमिली के 22 लोग हैं।
- ऊपर की लाइन में (बाएं से दाएं) सुधीर चंद्र बोस, शरत चंद्र बोस, सुनील चंद्र और सुभाष चंद्र बोस हैं।
- बीच की लाइन में (बीच में बैठ हुए) नेताजी के पि‍ता जानकी नाथ बोस, मां प्रभावती देवी और तीन बहनें हैं।
- फोटो में नीचे की लाइन में जानकी नाथ बोस के पोते-पोतियां हैं। इसके अलावा भी कई अन्य फैमि‍ली फोटोज मिली हैं।
- गुमनामी बाबा के मकान मालिक के मुताबिक, 4 फरवरी, 1986 को नेताजी के भाई सुरेश चंद्र बोस की बेटी ललिता यहां आई थीं। उन्होंने ही फोटो में लोगों की पहचान की थी।
- आखिरी बक्से से आजाद हिंद फौज (आईएनए) के कमांडर पबित्र मोहन राय, सुनील दास गुप्ता या सुनील कृष्ण गुप्ता के 23 जनवरी या दुर्गापूजा में आने को लेकर लेटर और टेलीग्राम भी मिले हैं।
- पबित्र मोहन राय ने एक पत्र में गुमनामी बाबा को कभी स्वामी जी तो कभी भगवन जी कहा है।
क्या उठ रहे सवाल?
- सवाल यह है कि अगर गुमनामी बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस नहीं थे तो कौन थे?
- अगर वे गुमनामी बाबा या कोई और थे तो उनके बक्से में बोस की फैमि‍ली फोटोज क्यों थीं?
क्या कहते हैं गुमनामी बाबा के मकान मालि‍क?
- गुमनामी बाबा ने राम भवन में जिंदगी के अंतिम तीन साल (1982-85) गुजारे। राम भवन के मालि‍क शक्ति सिंह हैं।
- सिंह के मुताबिक, हाईकोर्ट का प्रदेश सरकार को ऑर्डर है कि‍ रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक टीम बनाई जाए, जो गुमनामी बाबा के बक्से में मिली चीजों की जांच करेगी।
- प्रशासनिक कमेटी की जांच के तीन दि‍न बाद टेक्निकल कमेटी सामान की जांच करेगी।
पहले के बक्सों से क्या मिला?
- गोल फ्रेम का एक चश्मा मिला था। वह ठीक वैसा ही है, जैसा बोस पहनते थे।
- एक रोलेक्स घड़ी मिली। ऐसी घड़ी बोस अपनी जेब में रखते थे।
- कुछ लेटर मिले, जो नेताजी की फैमिली मेंबर ने लिखे थे। न्यूज पेपर्स की कुछ कटिंग्स मिलीं, जिनमें बोस से जुड़ी खबरें हैं।
- आजाद हिंद फौज की यूनिफॉर्म भी मिली।
- सिगरेट, पाइप, कालीजी की फ्रेम की गई तस्वीर और रुद्राक्ष की कुछ मालाएं।
- एक झोले में बांग्ला और अंग्रेजी में लिखी 8-10 लिटरेचर की किताबें मिलीं। मंत्र जाप की कुछ मालाएं भी थीं।
पब्लिक किए जा सकते हैं सामान?
- सामान को पब्लिक करने के लिए नेताजी की भतीजी ललिता बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस मंच ने दो अलग-अलग रिट दायर की थी।
- इस पर सुनवाई करते हुए 31 जनवरी, 2013 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को ऑर्डर दिया था कि गुमनामी बाबा के सामान को म्यूजियम में रखा जाए, ताकि आम लोग उन्हें देख सकें।
- हाल में ही मोदी सरकार ने नेताजी की फाइलें पब्लिक की हैं। इसके बाद उनकी फैमिली ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात की थी।
- बोस की फैमिली ने कोर्ट के ऑर्डर के तहत सीएम से गुमनामी बाबा के सामानों को पब्लिक करने की गुजारिश की थी। इसके बाद ही यह प्रॉसेस शुरू हुई।


कौन थे गुमनामी बाबा?
- फैजाबाद जिले में एक योगी रहते थे, जिन्हें पहले भगवनजी और बाद में गुमनामी बाबा कहा जाने लगा।
- मुखर्जी कमीशन ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फैजाबाद के भगवनजी या गुमनामी बाबा और नेताजी सुभाष चंद्र बोस में काफी समानताएं थीं।
- 1945 से पहले नेताजी से मिल चुके लोगों ने गुमनामी बाबा से मिलने के बाद माना था कि वही नेताजी थे। दोनों का चेहरा काफी मिलता-जुलता था।
- रिपोर्ट में कहा गया है कि 23 जनवरी (नेताजी का जन्मदिन) और दुर्गा-पूजा के दिन कुछ फ्रीडम फाइटर, आजाद हिंद फौज के कुछ मेंबर्स और पॉलिटिशियन गुमनामी बाबा से मिलने आते थे।


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 16 Mar 2016  Dainik Jagran 

लखनऊ। गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी उर्फ साधु उर्फ अनाम संत जैसे नामों से वर्षों तक गुमनामी की जिंदगी जीने वाले गुमनामी बाबा को अपनी पहचाने छिपाने के लिए लगातार ठिकाना बदलना पड़ा। मुखर्जी आयोग के बक्से से मिले सबूत बताते हैं कि उन्होंने पहला पड़ाव नेपाल सीमा पर किसी गांव में बनाया। संभवत: यह गांव शोलापुरी था। फिर नैमिषारण्य, जो सीतापुर जिले में है। वहां से बस्ती जिले के एक गांव चले गए। अगला पड़ाव अयोध्या का लखनउवा मंदिर और अंतिम पड़ाव फैजाबाद के सिविल लाइंस स्थित राम भवन में रहा। उन्होंने सदैव अपने चेहरे को भी छिपाया।
आज फैजाबाद कोषागार के डबल लॉक से निकाले गए सबूतों में रोलेक्स रिस्ट वाच, ओमेगा रिस्ट वाच व आकर्षित करने वाली कोरोनोमीटर है। यह लाकेट घड़ी उसी तरह है जैसी गांधी जी कमर में लटकाते थे। पत्र तो बेशुमार हैं। सभी पत्र एक ही तरफ इशारा करते हैं। आजाद हिंद सेना के प्रमुख रहे पवित्र मोहन राय का पत्र गुमनामी बाबा की कुंडली के बारे में बताता है। कुंडली कहती है कि 1944-45 में कोई दुर्घटना नहीं हुई है। ज्योतिषी ने जैसा बताया था, 1945 के बाद वही हो रहा है। 1955-60 में बड़े रोग से आक्रांत होना बताया, धर्मशाला में आप बीमार पड़े। इसी पत्र में संतोष, दुलाल, विजय व बाबू सुकृत का भी उल्लेख है। आशंका है कि ये गुमनामी बाबा से गुपचुप जुड़े थे। 14 जुलाई 77 को भेजा गया बांग्ला भाषा का पत्र है, जिसमें पवित्र मोहन राय ने सपने के सहारे सोच को बयां किया है। लिखा है कि 19 जुलाई को पहुंचा, आपने कुछ विशिष्ट लोगों की जानकारी चाही है। आगे सपने का जिक्र कर बताया गया है कि समय 1930 का वर्ष का है, पितृ देव का कर्मस्थल मैमन ङ्क्षसह, जिला टांगा का कोई गांव है, जहां काली जी मूर्ति की स्थापना गयी। देखा रास्ते में सतगुरु चले आ रहे हैं, गेरुआ वस्त्र पहने हैं, महराज पूर्वी पाकिस्तान के हैं, भारत में रहने लगे हैं। आपके अखंड भारत का स्वप्न को जानकर उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान में ही रह कर काम करने की इच्छा जताई है। बासंती देवी ने आपका समाचार जानने के बारे में कहा है।
आनंद बाजार पत्रिका के 25 सितंबर 1974 से 22 सितंबर 1974 के अंक मिले हैं। आर्टिकिल लेखक वरुण सेन गुप्त का आर्टिकिल ध्यान खींचता है। क्या ताइहाकू विमान दुर्घटना सजाई हुई दुर्घटना थी। लेखक ने खोसला कमीशन में वकीलों की दलीलों को झूठा साबित किया है। यह भी सिद्ध किया है कि वह भविष्य में इसका प्रमाण भी प्रस्तुत कर सकता है। लेखक ने आजाद हिंद फौज की महिला खुफिया शाखा की मुखिया लीला राय के हवाले से उल्लेख किया है कि उन्होंने क्या मृत्यु के पूर्व नेता जी का बयान लिया था। कुछ लोग मानते हैं कि नेता जी जीवित हैं। लीला राय कुछ चुने हुए लोगों को लेकर नेपाल सीमांत नैमिषारण्य में एक साधु के पास ले गयीं। लीला राय ने साधु की वाणी मासिक पत्रिका में कई माह तक छापी थीं। महामानव या साधु ही नेता जी थे, यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता। शालमारी गांव में साधु को लेकर काफी शोर-गुल हुआ था कि नेता जी जीवित हैं, साधु ही नेता जी हैं। इसी के बाद वह शालमारी आश्रम छोड़ कर चले जाते हैं। कुछ समय बाद ढाका के अध्यापक अतुल सेन नैमिषारण्य आते हैं। वह साधु को देखकर अवाक रह जाते हैं। उन्होंने नेहरू का पत्र लिखा। नेहरू टरकाते रहे। पवित्र मोहन राय का कहना था कि लीला राय ने नेता जी को करीब से देखा था।
213 सुबूतों की गिनती बाकी
गुमनामी बाबा से जुड़ी वस्तुओं की गणना अब अंतिम पड़ाव पर है। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक योगेश कुमार, विथिक सहायक मानस तिवारी, कलेक्ट्रेट के प्रशासनिक अधिकारी सतवंत सिंह सेठी, आमंत्रित सदस्य शक्ति सिंह की मौजूदगी में 205 सबूतों की गिनती की गयी। मुखर्जी आयोग के इस बक्से से अभी तक 918 सबूतों की गिनती की जा चुकी है, बचे 211 सुबूतों की गिनती गुरुवार का पूरा होने का अनुमान है।


                                     बोस के बारे में कुछ और जानने के लिए नीचे  क्लिक करें  - RAMESH KHOLA

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी 

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